बहुत दिनों से अमरीका और चीन के बीच तनाव बढ़ता घटता नज़र आ रहा। जैसे की किसी एक मुद्दे पर तनाव कम होता है कोई दूसरा मुद्दा सामने आ जाता है जिस पर दोनों देश फिर से एक दूसरे के सामने खड़े हो जाते हैं। आज कल कोरोना की वजह से दोनों देशों के मध्य तनाव चरम पर है। कोरोना की वजह से विशेषज्ञ यह अनुमान लगा रहे हैं कि विशेष कर पश्चिम में अर्थ व्यवस्था की गाड़ी मुश्किल से ही चलेगी यही वजह है कि अमरीका में ट्रम्प की सरकार चीन के साथ युद्ध की आग भड़का सकती है। लेकिन सवाल यह है कि युद्ध का एलान कैसे होगा? क्या यह युद्ध, तीसरा विश्व युद्ध बन जाएगा? या फिर एक सीमित युद्ध ही रहेगा? क्या इस संभावित युद्ध से दूसरे देश भी प्रभावित होंगे? आज कल इस प्रकार के सवालों का जवाब विशेषज्ञ ढूंढ रहे हैं। लेकिन अगर अमरीका और चीन के बीच युद्ध होता है तो क्या इसकी वजह केवल कोरोना ही होगा?
विशेषज्ञ और रिसर्च सेंटर के अनुसार यह सही नहीं है क्योंकि तीसरी सहस्त्राब्दी के आरंभ से ही अमरीका व चीन के बीच गंभीर खींचतान शुरु हो गयी थी लेकिन अमरीकी राजनेताओं ने अलग अलग शैलियों में चीन के साथ तनाव के प्रति रवैया अपनाया। हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर स्टीवन एक वॉल्ट ने फारेन पालीसी पत्रिका में प्रकाशित अपने एक लेख में लिखा है कि बाराक ओबामा की नीति अमरीका की शक्ति वापस लाना और चीन के साथ भागीदारी पर आधारित थी लेकिन डोनाल्ड ट्रम्प ने उस समझौते को फाड़ कर फेंक दिया और चीन के मुकाबले में जापान, दक्षिणी कोरिया, युरोपीय संघ और विश्व की बड़ी अर्थ व्यवस्थाओं को खड़ा करने के बजाए खुद ही इन सभी देशों के खिलाफ मैदान में कूद पड़े जिसकी वजह से अमरीका चीन के मुकाबले में बिल्कुल अकेला पड़ गया।
चीन और अमरीका के बीच युद्ध के बारे में अनुमान कई साल पहले से लगाए जा रहे हैं क्योंकि बहुत से चिन्हों से पता चलता है कि चीन की अर्थ व्यवस्था इतनी उठ चुकी है कि वह अब अमरीकी अर्थ व्यवस्था की बराबरी कर रही है और अगर इसी तेज़ी से आगे बढ़ती रही तो सन 2030 तक संभावित रूप से चीन अमरीकी अर्थ व्यवस्था को भी पीछे छोड़ देगा। इस तरह से चीन दुनिया की सब से बड़ी अर्थ व्यवस्था बन जाएगा। यही वजह है कि अमरीका चीन को इस पोज़ीशन पर पहुंचने से रोकने के लिए बुरी तरह से हाथ पैर मार रहा है। अब कोरोना संकट के आंरभ के बाद ट्रम्प चीन पर कोरोना फैलाने का आरोप लगा कर अरबों डॉलर हर्जाना मांग रहे हैं जो चीन देने वाला नहीं इस लिए ट्रम्प इस बहाने से चीन के साथ दक्षिणी चीन सागरमें युद्ध की आग भड़का सकते हैं।
इसके अलावा विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि अमरीका दक्षिणी चीन सागर जाने वाले रास्ते को बंद कर सकता है और इसी लिए अमरीका उन सभी क्षेत्रों पर अपना वर्चस्व चाहता है जहां जहां से तेल निकलता है क्योंकि अमरीका को लगता है कि अगर चीन तक तेल पहुंचने न दिया जाए तो उसके लिए एक बहुत बड़ा संकट होगा। तेल की कमी से चीन में सब कुछ ठप्प हो जाएगा फिर टकराव शुरु होगा और कई महीनों तक यह संकट जारी रहेगा फिर दोनों पक्ष वार्ता करेंगे जिसके बाद एक समझौता हो जाएगा। क्योंकि हमेशा युद्ध संधि पर खत्म होता है और पहले और दूसरे विश्व युद्ध मे भी यही हुआ था। चीन और अमरीका में संधि के बाद पूरी दुनिया ही बदल जाएगा और एक नयी व्यवस्था लागू होगी जो वर्तमान विश्व व्यवस्था से बहुत अलग होगी। Q.A. साभार, अलकुदसुल अरबी